Tata Harrier Defect Case
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Tata Harrier Defect Case: Consumer Court ने दिया ₹21.40 लाख Refund का आदेश

Tata Harrier Defect Case: Consumer Court का बड़ा फैसला

Tata Harrier से जुड़े एक महत्वपूर्ण consumer dispute में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Tata Motors को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह ग्राहक की Harrier SUV को नई defect-free गाड़ी से replace करे या ₹21.40 लाख की पूरी खरीद राशि 9% सालाना ब्याज के साथ वापस करे।

मामला एक Tata Harrier XZA+ Dark Edition से जुड़ा है, जिसे पालमपुर निवासी Dr. Krishan Lal Kapoor ने मई 2022 में ₹21.40 लाख में खरीदा था। शिकायत के अनुसार, वाहन में डिलीवरी के कुछ समय बाद ही गंभीर तकनीकी समस्याएं सामने आने लगी थीं।

1,000 किलोमीटर के अंदर शुरू हुई परेशानी

शिकायत के मुताबिक, SUV के लगभग 1,000 किलोमीटर चलने के बाद steering में vibration और knocking जैसी समस्याएं सामने आईं। इसके बाद power steering assembly को warranty के तहत बदला गया।

हालांकि, ग्राहक का दावा था कि steering से जुड़ी परेशानियां बाद में भी दोबारा आती रहीं।

मामला तब और गंभीर हो गया जब वाहन में timing belt से जुड़ी दो बड़ी failures सामने आईं।

दो बार Timing Belt Failure ने बढ़ाई परेशानी

पहली घटना अगस्त 2023 में हुई। रिपोर्ट के अनुसार, Harrier highway पर अचानक बंद हो गई, जिसके बाद परिवार को कई घंटे तक roadside assistance का इंतजार करना पड़ा।

इसके बाद मार्च 2024 में करीब 26,700 किलोमीटर चलने के बाद एक बार फिर इसी तरह की timing belt failure की समस्या सामने आई। दोनों घटनाओं में वाहन की extensive repairs करनी पड़ीं।

Consumer Commission ने Manufacturing Defect क्यों माना?

मामले में आयोग ने एक independent automobile expert की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना। रिपोर्ट में बताया गया कि सामान्य परिस्थितियों में आधुनिक diesel SUV की timing belt की expected life आम तौर पर करीब 90,000–100,000 किलोमीटर हो सकती है।

ऐसे में 30,000 किलोमीटर तक पहुंचने से पहले ही timing belt का दो बार fail होना असामान्य माना गया।

रिपोर्ट के अनुसार, आगे की जांच में timing bracket assembly के misalignment की बात सामने आई, जिसे बार-बार होने वाली failure का संभावित root cause बताया गया।

आयोग ने माना कि इस तरह की खराबी highway पर वाहन के अचानक रुकने का कारण बन सकती है, जिससे वाहन में बैठे लोगों और अन्य road users के लिए safety risk पैदा हो सकता है।

इसी आधार पर आयोग ने इसे केवल सामान्य wear and tear या routine maintenance issue न मानकर inherent manufacturing defect से जुड़ा मामला माना।

3. Tata Motors को क्या आदेश दिया गया?

Consumer Commission ने Tata Motors को निम्न में से remedy देने का निर्देश दिया:

आदेशविवरण
🚘 Vehicle Replacementनई defect-free Tata Harrier या equivalent upgraded model
💰 Refund₹21.40 लाख
📈 Interestशिकायत दर्ज होने की तारीख से 9% सालाना ब्याज
⚖️ Compensationमानसिक परेशानी और harassment के लिए ₹1 लाख
📄 Litigation Cost₹15,000

यानी ग्राहक के लिए आदेश का मुख्य विकल्प या तो नई defect-free SUV है या फिर खरीद राशि की वापसी।

Warranty Repair के बावजूद क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

वाहनों में warranty repairs होना सामान्य बात है। लेकिन यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां शिकायत केवल किसी एक isolated component failure तक सीमित नहीं रही।

बार-बार आने वाली समस्याएं, timing belt की repeated failures और संभावित safety risk ने मामले को गंभीर बना दिया।

इस फैसले से यह संदेश मिलता है कि केवल बार-बार repair कर देना हर परिस्थिति में manufacturer को consumer liability से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब underlying problem लगातार बनी रहे।

4. Automakers के लिए क्या संदेश?

यह फैसला वाहन निर्माताओं के लिए भी कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। Recurring defect सामने आने पर कंपनियों के लिए केवल component replacement के बजाय root-cause analysis करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

ऐसे मामलों में manufacturers के लिए प्रमुख lessons हैं:

  • बार-बार आने वाली खराबी की जल्दी पहचान करना।
  • Root cause की गहराई से जांच करना।
  • Customer को समस्या और repair process के बारे में स्पष्ट जानकारी देना।
  • Critical safety-related failures में proactive replacement पर विचार करना।
  • Manufacturing और quality-control processes को मजबूत करना।
  • गंभीर शिकायतों को केवल routine warranty repair के रूप में नजरअंदाज न करना।

आज के social-media दौर में एक customer का खराब ownership experience तेजी से बड़ी संख्या में potential buyers तक पहुंच सकता है।

5. Vehicle Owners के लिए क्या सीख?

इस मामले से car owners के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं।

अगर किसी वाहन में बार-बार एक ही तरह की गंभीर समस्या आ रही है, तो ग्राहक को:

  • सभी service records सुरक्षित रखने चाहिए।
  • Job cards और repair invoices संभालकर रखने चाहिए।
  • समस्या के फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करने चाहिए।
  • Manufacturer को लिखित रूप में complaint करनी चाहिए।
  • Warranty और service correspondence सुरक्षित रखनी चाहिए।
  • जरूरत पड़ने पर independent technical assessment कराया जा सकता है।
  • समस्या का समाधान न होने पर उपलब्ध consumer-redressal remedies पर विचार करना चाहिए।

ऐसे विवादों में proper documentation ग्राहक के दावे को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

6. Consumer Rights का बढ़ता महत्व

भारत में automobile buyers अब vehicle quality और after-sales service को लेकर पहले से अधिक जागरूक हैं। महंगी SUVs खरीदने वाले ग्राहक केवल features और design ही नहीं, बल्कि reliability, safety और after-sales support को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।

कांगड़ा Consumer Commission का यह आदेश इसी व्यापक consumer-awareness trend के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि एक consumer court case को Tata Harrier के सभी vehicles या सभी customers के ownership experience का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।

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