Income Tax Notice: बैंक में जमा ₹41.69 लाख कैश, ITR नहीं भरा और नोटिस का जवाब भी नहीं दिया; 4 साल की देरी पर ITAT ने खारिज की अपील
बेंगलुरु | 6 सितंबर 2026: बैंक खाते में ₹41.69 लाख नकद जमा होने, समय पर ITR दाखिल नहीं करने और आयकर विभाग की कार्रवाई का जवाब नहीं देने से जुड़े मामले में बेंगलुरु के एक टैक्सपेयर को ITAT से राहत नहीं मिली। आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT), बेंगलुरु बेंच ने करीब चार साल की देरी से दाखिल अपील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ITAT ने इस मामले में सीधे यह फैसला नहीं दिया कि ₹41.69 लाख की पूरी रकम वास्तव में अघोषित आय थी या नहीं। अपील समय-सीमा से बाहर होने के कारण खारिज हुई, इसलिए रकम की मूल टैक्स बढ़ोतरी के मेरिट पर विस्तृत फैसला नहीं हुआ।
💰 बैंक में जमा थे ₹41.69 लाख, लेकिन ITR नहीं था
मामला बेंगलुरु के इंदिरानगर निवासी एक व्यक्ति, जिसे रिपोर्टों में रेड्डी के नाम से बताया गया है, से जुड़ा है। उनका कहना था कि उनकी सालाना आय ₹5 लाख से कम थी और आय का मुख्य स्रोत किराया था।
रेड्डी के मुताबिक, उनके रोजमर्रा के खर्च पत्नी और पिता उठाते थे। इसी वजह से उन्होंने नियमित रूप से ITR दाखिल नहीं किया और न ही आयकर विभाग के ईमेल या ई-फाइलिंग पोर्टल पर आने वाली सूचनाओं को लगातार चेक किया।
लेकिन आयकर विभाग की नजर उनके बैंक खाते में जमा ₹41.69 लाख नकद पर पड़ी। विभाग ने इस रकम के स्रोत को संतोषजनक नहीं माना।
📌 आयकर विभाग ने क्या-क्या जोड़ा?
आयकर अधिकारी ने ₹41.69 लाख को आयकर अधिनियम की धारा 69A के तहत अघोषित/अस्पष्ट धन के रूप में जोड़ा।
इसके अलावा:
| रकम | विभाग की कार्रवाई |
|---|---|
| ₹41.69 लाख | धारा 69A के तहत अस्पष्टीकृत नकद |
| ₹3.69 लाख | अस्पष्टीकृत क्रेडिट |
| ₹1.50 लाख | बिजनेस/प्रोफेशन से आय |
| अतिरिक्त | ब्याज और पेनल्टी की कार्रवाई |
मामले में आकलन और बाद की अपील प्रक्रिया के दौरान टैक्सपेयर की ओर से समय पर जवाब नहीं दिया गया।
✈️ वीजा बनवाते समय पता चला था टैक्स केस
रेड्डी ने अपनी देरी को सही ठहराते हुए कहा कि उन्हें आयकर विभाग की कार्रवाई की जानकारी मार्च 2023 में मिली।
उनका कहना था कि जब वह विदेश यात्रा के लिए वीजा आवेदन तैयार कर रहे थे, तब उनसे ITR से जुड़े दस्तावेज मांगे गए। इसी प्रक्रिया में उन्हें पता चला कि उनके खिलाफ टैक्स से जुड़ी कार्रवाई और आदेश पहले ही हो चुके थे।
इसके बाद उन्होंने टैक्स प्रोफेशनल से संपर्क किया और अपील दाखिल की।
उन्होंने देरी के लिए कई कारण बताए:
- टैक्स नियमों की सीमित जानकारी
- सालाना आय कम होना
- नियमित रूप से ITR नहीं भरना
- ईमेल और इनकम टैक्स पोर्टल चेक नहीं करना
- कोविड-19 महामारी के दौरान हुई परेशानियां
लेकिन ITAT को ये कारण करीब चार साल की देरी को पूरी तरह समझाने के लिए पर्याप्त नहीं लगे।
⏳ अपील दाखिल करने में 1,480 दिन की देरी
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अपील में हुई असाधारण देरी थी।
मुख्य टैक्स अपील लगभग 1,480 दिन की देरी से दाखिल हुई। वहीं दो पेनल्टी अपीलों में करीब 1,298-1,298 दिन की देरी हुई।
पहले Commissioner of Income Tax (Appeals)/NFAC ने देरी माफ करने से इनकार कर दिया। इसके बाद टैक्सपेयर ने ITAT का रुख किया।
लेकिन ITAT ने भी देरी को माफ करने से इनकार कर दिया और अपीलों को time-barred मानते हुए खारिज कर दिया।
⚖️ ITAT ने क्यों नहीं मानी दलील?
ITAT ने यह भी गौर किया कि टैक्सपेयर ने पहले के वर्षों में ITR दाखिल किया था। इसलिए यह दलील कि उन्हें आयकर अनुपालन या ITR दाखिल करने की जानकारी ही नहीं थी, पूरी तरह स्वीकार करना मुश्किल था।
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने यह भी नोट किया कि उन्होंने पहले एक ₹39 लाख की प्रॉपर्टी बिक्री की थी और संबंधित वर्ष में ITR दाखिल नहीं किया था।
इससे उनकी यह दलील कमजोर हुई कि उन्हें टैक्स अनुपालन की जानकारी नहीं थी।
ITAT ने यह सिद्धांत भी दोहराया कि लंबी देरी को कुछ परिस्थितियों में माफ किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए ठोस, विश्वसनीय और पर्याप्त रूप से समर्थित कारण होना जरूरी है। केवल सहानुभूति या सामान्य कारणों के आधार पर बहुत लंबी देरी माफ नहीं की जा सकती। Tribunal ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के Sheo Raj Singh (Deceased) through LRs & Others v. Union of India फैसले का हवाला दिया।
⚠️ क्या ₹41.69 लाख पर ITAT ने अंतिम फैसला दे दिया?
नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।
ITAT ने यह तय नहीं किया कि ₹41.69 लाख की रकम वास्तव में अघोषित आय थी या टैक्सपेयर उसके स्रोत को साबित कर सकता था।
अपील ही देरी के कारण खारिज हो गई। इसलिए Tribunal ने धारा 69A के तहत ₹41.69 लाख की मूल बढ़ोतरी के मेरिट पर फैसला नहीं किया।
इसका मतलब है कि इस आदेश का मुख्य मुद्दा अपील में हुई देरी था, न कि नकद जमा की वास्तविक प्रकृति पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष।
📋 इस केस से टैक्सपेयर्स को क्या सीख मिलती है?
यह मामला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो इनकम टैक्स विभाग के नोटिस को नजरअंदाज कर देते हैं।
1. 📧 ईमेल और टैक्स पोर्टल नियमित चेक करें
इनकम टैक्स से संबंधित संचार डिजिटल माध्यमों से आ सकता है। केवल यह कहना कि पोर्टल या ईमेल चेक नहीं किया, लंबी देरी को अपने-आप जायज नहीं बनाता।
2. 🧾 बड़े कैश ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रखें
अगर बैंक खाते में बड़ी रकम नकद जमा की जाती है तो उसके स्रोत और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
3. ⏰ अपील की समय-सीमा को गंभीरता से लें
टैक्स आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने की निर्धारित समय-सीमा होती है। बहुत ज्यादा देरी होने पर पहले देरी माफी का सवाल उठ सकता है।
4. 💼 कम आय का मतलब हमेशा ITR से पूरी तरह छूट नहीं
ITR दाखिल करने की बाध्यता केवल इस बात से तय नहीं होती कि व्यक्ति अपनी आय को कितना बताता है। संबंधित वित्तीय वर्ष के लागू नियम और अन्य परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।
5. 👨💼 नोटिस मिले तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें
अगर टैक्स नोटिस समझ नहीं आ रहा है तो समय सीमा खत्म होने का इंतजार करने के बजाय CA या टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
🏛️ अब आगे क्या विकल्प है?
रिपोर्टों के अनुसार, ITAT का आदेश 17 अगस्त 2026 को आया था। टैक्सपेयर के पास परिस्थितियों के अनुसार आयकर अधिनियम की धारा 260A के तहत संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने का विकल्प हो सकता है, खासकर यदि मामला कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न से जुड़ा हो।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हाईकोर्ट में आगे की चुनौती की स्वीकार्यता और दायरा मामले के कानूनी तथ्यों पर निर्भर करेगा।
📊 Income Tax Case: एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | बेंगलुरु |
| टैक्सपेयर | रेड्डी |
| बैंक में नकद जमा | ₹41.69 लाख |
| धारा 69A के तहत जोड़ | ₹41.69 लाख |
| अन्य अस्पष्टीकृत क्रेडिट | ₹3.69 लाख |
| अन्य आय | ₹1.50 लाख |
| मुख्य अपील में देरी | लगभग 1,480 दिन |
| पेनल्टी अपीलों में देरी | लगभग 1,298 दिन |
| ITAT फैसला | 17 अगस्त 2026 |
| नतीजा | अपीलें देरी के कारण खारिज |
| ₹41.69 लाख की मेरिट पर फैसला? | नहीं |
| संभावित आगे का रास्ता | धारा 260A के तहत हाईकोर्ट |







