भारत की प्रमुख स्वास्थ्य योजना Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PMJAY) को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। नए नियम के तहत सैकड़ों अनुभवी कैंसर विशेषज्ञों को इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से रोक दिया गया है।
⚠️ आखिर क्यों हटाए गए डॉक्टर?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फैसले की सबसे बड़ी वजह नए पात्रता (eligibility) नियम हैं। अब केवल वही डॉक्टर PMJAY के तहत इलाज कर सकते हैं जिनके पास National Medical Commission (NMC) द्वारा मान्यता प्राप्त डिग्री जैसे DM, MCh या DrNB हैं।
समस्या यह है कि कई अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट (cancer specialists) के पास ये डिग्रियां नहीं हैं, बल्कि उन्होंने सालों का अनुभव और फेलोशिप ट्रेनिंग के जरिए विशेषज्ञता हासिल की है।
📉 क्या होगा इसका असर?
भारत में हर साल करीब 15 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहले से ही कमी है।
अब जब सैकड़ों डॉक्टरों को पैनल से हटा दिया गया है, तो इसके कई गंभीर असर हो सकते हैं:
- ❗ गरीब मरीजों के इलाज के विकल्प कम होंगे
- ❗ छोटे शहरों (Tier-2, Tier-3) में इलाज और मुश्किल होगा
- ❗ कैंसर ट्रीटमेंट में देरी बढ़ सकती है
- ❗ हेल्थ सिस्टम पर दबाव और बढ़ेगा
🏥 डॉक्टरों की क्या प्रतिक्रिया है?
कई डॉक्टरों का कहना है कि यह नियम अनुभव की अनदेखी करता है। उनका तर्क है कि पहले ऑन्कोलॉजी में फेलोशिप ही मुख्य ट्रेनिंग का तरीका था, इसलिए कई सीनियर डॉक्टरों के पास पारंपरिक डिग्री नहीं है, लेकिन उनका अनुभव बेहद मजबूत है।
📊 बड़ी चिंता क्यों?
- भारत में लगभग 1 मिलियन लोगों पर 1 ऑन्कोलॉजिस्ट है
- कुल मिलाकर करीब 4000 कैंसर विशेषज्ञ ही उपलब्ध हैं
- ऐसे में 300+ डॉक्टरों को हटाना बड़ा झटका माना जा रहा है
🧠 एक्सपर्ट व्यू
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम क्वालिटी कंट्रोल के लिए लिया गया हो सकता है, लेकिन इसका सीधा असर मरीजों की पहुंच (accessibility) पर पड़ सकता है।
अगर नियमों में लचीलापन नहीं लाया गया, तो यह फैसला गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।









