उत्तराखंड में बड़ा खतरा: नेपाल में भूस्खलन से चमेलिया नदी पर बनी झील, पिथौरागढ़ से चंपावत तक 50 हजार आबादी पर संकट
पिथौरागढ़/चंपावत: नेपाल के दार्चुला जिले के अपिहिमाल क्षेत्र के भट्टार में भारी भूस्खलन के कारण चमेलिया नदी का प्रवाह बाधित होने से कृत्रिम झील जैसी स्थिति बन गई है। इस घटनाक्रम ने भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ा दी है। यदि जमा पानी अचानक तेज बहाव के साथ नीचे आता है और महाकाली (काली) नदी में मिलता है, तो उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
40 किलोमीटर दूर बनी झील, भारत में बढ़ाई गई निगरानी
नेपाल के दार्चुला जिले के भट्टार में पहाड़ी दरकने के बाद चमेलिया नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए पूरी तरह बाधित हुआ। नेपाली मीडिया के अनुसार भूस्खलन के बाद नदी करीब आधे घंटे तक रुकी रही और कृत्रिम तालाब जैसी स्थिति बन गई। जोखिम को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है।
भट्टार में बनी इस कृत्रिम झील की भारतीय क्षेत्र से हवाई दूरी करीब 40 किलोमीटर बताई गई है। चमेलिया आगे जाकर महाकाली नदी में मिलती है और महाकाली ही भारत-नेपाल सीमा के बड़े हिस्से को निर्धारित करती है। ऐसे में पानी का अचानक दबाव बढ़ने पर भारतीय क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है।
धारचूला में काली नदी चेतावनी स्तर के बेहद करीब
नेपाल में बने इस हालात के बीच उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में काली नदी का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार धारचूला में काली नदी 888.90 मीटर पर बह रही थी, जबकि इसका चेतावनी स्तर 889 मीटर है। यानी नदी चेतावनी स्तर से केवल 10 सेंटीमीटर नीचे थी।
जलस्तर बढ़ने से धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट, तीतरी, ड्योड़ा और झूलाघाट समेत नदी किनारे बसे इलाकों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है।
पिथौरागढ़ से चंपावत तक 50 हजार से ज्यादा आबादी पर नजर
स्थिति बिगड़ने की स्थिति में पिथौरागढ़ के गेठीगड़ा, सिमपानी, तालेश्वर, झूलाघाट, कानड़ी, सप्तड़ी, सीमू, बलतड़ी, तड़ीगांव और हल्दू जैसे क्षेत्रों के साथ चंपावत के सीमावर्ती गांवों और टनकपुर तक असर पहुंचने की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक इन इलाकों और नेपाल की सीमा से लगे क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक आबादी संभावित जोखिम के दायरे में आ सकती है। हालांकि यह एक संभावित जोखिम का आकलन है; इसका अर्थ यह नहीं है कि इतने लोगों पर तत्काल बाढ़ आ गई है।
बनबसा बैराज पर लगातार चौथे दिन रेड अलर्ट
सीमावर्ती क्षेत्र में नदी जलस्तर की स्थिति पहले से ही गंभीर बनी हुई है। शुक्रवार को बनबसा बैराज पर शारदा नदी का जलस्तर दोपहर दो बजे 1,31,334 क्यूसेक दर्ज किया गया। इससे पहले सुबह छह बजे यह 1,02,342 क्यूसेक था, जो लगातार बढ़कर दोपहर तक 1.31 लाख क्यूसेक से अधिक हो गया।
सुरक्षा कारणों से बैराज पर लगातार चौथे दिन चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक रही। बैराज प्रशासन के अनुसार नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से नीचे आने के बाद ही वाहनों का संचालन दोबारा शुरू किया जा सकेगा।
घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर रोड भी बंद
भारी बारिश के बीच पिथौरागढ़ जिले में सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। शुक्रवार देर शाम घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर रोड पर मुन्ना बैंड के पास पहाड़ी दरकने से सड़क बंद हो गई। बोल्डर और मलबा गिरने के कारण दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई।
सड़क खोलने के लिए जेसीबी भेजी गई, लेकिन लगातार दरकते पहाड़ के कारण मलबा हटाने में मुश्किल आई। प्रशासन ने जल्द आवाजाही बहाल करने के प्रयास जारी रहने की जानकारी दी।
प्रशासन की नजर नेपाल से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक
नेपाल में चमेलिया नदी के अवरुद्ध होने की घटना के बाद दोनों तरफ नदी तंत्र पर निगरानी बढ़ गई है। नेपाल में स्थानीय प्रशासन ने भी जोखिम वाले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई है और कुछ परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
भारत की ओर भी काली और शारदा नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल सबसे अहम चिंता यह है कि यदि नेपाल में जमा पानी अचानक बड़ी मात्रा में नीचे की ओर आता है, तो उसका प्रभाव महाकाली-काली नदी के प्रवाह पर कितना पड़ता है।
नोट: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और प्रशासनिक/मीडिया सूचनाओं पर आधारित







