🏛️ कर्नाटक की नई कांग्रेस सरकार को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद पहला बड़ा झटका लगा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कैबिनेट मंत्री Ramalinga Reddy ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि उन्हें बेंगलुरु शहरी विकास विभाग देने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में यह मंत्रालय किसी और को सौंप दिया गया।
⚡ DK शिवकुमार पर सीधा आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेड्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री D. K. Shivakumar स्वयं उनके घर आए थे और आश्वासन दिया था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वे बेंगलुरु विकास मंत्रालय छोड़ देंगे और रेड्डी को यह विभाग सौंपा जाएगा।
🗣️ “दो बार मुझे भरोसा दिया गया, लेकिन अंत में मुझे जल संसाधन विभाग दे दिया गया।”
📌 क्यों नाराज हैं रेड्डी?
रेड्डी का कहना है कि उन्होंने खुद कभी इस विभाग की मांग नहीं की थी।
लेकिन:
✅ दो बार आश्वासन मिला
✅ शपथ ग्रहण से एक दिन पहले भी भरोसा दिया गया
✅ अंतिम समय में मंत्रालय बदल दिया गया
इसी कारण उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का फैसला किया।
📝 समर्थक के हाथ भेजा इस्तीफा
दिलचस्प बात यह रही कि रेड्डी ने अपना इस्तीफा सीधे मुख्यमंत्री को नहीं सौंपा।
उन्होंने अपने समर्थक के जरिए इस्तीफा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भिजवाया।
इस्तीफे में उन्होंने लिखा:
“मैं कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री का धन्यवाद करता हूं, लेकिन अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं कर सकता, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा देता हूं।”
🏙️ किसे मिला बेंगलुरु विकास विभाग?
जिस विभाग की मांग रेड्डी कर रहे थे, वह आखिरकार Krishna Byre Gowda को सौंप दिया गया।
यही फैसला विवाद की मुख्य वजह बना।
🤝 पार्टी नहीं छोड़ेंगे रेड्डी
हालांकि रेड्डी ने साफ किया है कि:
✅ वे कांग्रेस नहीं छोड़ रहे
✅ विधायक बने रहेंगे
✅ पार्टी कार्यकर्ता के रूप में काम जारी रखेंगे
उनका विरोध केवल मंत्रालय आवंटन को लेकर है।
🔥 कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती
नई सरकार के गठन के तुरंत बाद यह इस्तीफा कांग्रेस नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन गया है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि असंतुष्ट नेताओं को जल्द संतुष्ट नहीं किया गया तो सरकार के भीतर और भी असंतोष सामने आ सकता है।






