₹47 हजार भारत में vs ₹22 लाख अमेरिका में! भारतीय युवक ने बताया हेल्थकेयर का अनुभव, कहा- वापस आना चाहता हूं
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय युवक का भारत और अमेरिका की हेल्थकेयर व्यवस्था को लेकर अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा में है। युवक ने दो अलग-अलग मेडिकल इमरजेंसी का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में इलाज का खर्च करीब ₹47,000 आया, जबकि अमेरिका में एक मेडिकल इमरजेंसी के बाद अस्पताल का बिल करीब $23,000 यानी लगभग ₹22 लाख पहुंच गया।
युवक के मुताबिक, अमेरिका में अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस होने के बावजूद उसे करीब $7,000 यानी लगभग ₹6.67 लाख अपनी जेब से देने पड़े। हालांकि, ये आंकड़े और अनुभव युवक के अपने दावे हैं और इन्हें दोनों देशों की पूरी हेल्थकेयर व्यवस्था की सार्वभौमिक तुलना नहीं माना जा सकता।
भारत में इलाज का बिल आया करीब ₹47 हजार
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, Yuvaan Ibañez Garware ने इंस्टाग्राम वीडियो में भारत में अपने एक पुराने मेडिकल अनुभव को साझा किया।
उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले वह कई बार बेहोश हुए थे। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके अनुसार बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया के उन्हें प्राइवेट रूम मिल गया।
युवक ने दावा किया कि अस्पताल में ECG, MRI, CT Scan और Blood Tests समेत कई जांच की गईं। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वह डॉक्टर से बात कर पा रहे थे और कुछ दिनों बाद उन्हें बीमारी और इलाज की जानकारी दी गई।
उनके अनुसार, इस पूरे इलाज का बिल करीब $500 यानी लगभग ₹47,000 आया।
अमेरिका में Chest Pain के बाद पहुंचा अस्पताल
युवक ने इसके बाद अमेरिका में हुए एक दूसरे मेडिकल अनुभव के बारे में बताया। उनके मुताबिक, बास्केटबॉल खेलते समय उन्हें तेज सीने में दर्द हुआ।
उन्होंने दावा किया कि एंबुलेंस के खर्च को लेकर चिंतित होने के कारण वह खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने डेढ़ घंटे से ज्यादा इंतजार करने और कागजी प्रक्रिया पूरी होने की बात कही।
उनके मुताबिक, अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उन्हें “mini heart attack” हुआ था और इसके बाद कई जांच की गईं।
डॉक्टर से मिलने में परेशानी का भी दावा
Yuvaan ने अपने वीडियो में दावा किया कि अस्पताल में रहने के दौरान डॉक्टर से मिलने के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि ब्लड सैंपल लेने के दौरान उन्हें परेशानी हुई।
उन्होंने दावा किया कि आखिर में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उनके अनुसार उन्हें स्पष्ट डायग्नोसिस या फॉलो-अप प्लान नहीं मिला।
इसके बाद जब अस्पताल का बिल आया तो वह $23,000 यानी करीब ₹22 लाख था।
Insurance होने के बाद भी ₹6.67 लाख जेब से देने का दावा
Yuvaan ने बताया कि उनके पास अमेरिका में अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी थी और इसके लिए वह हजारों डॉलर का भुगतान करते थे। इसके बावजूद उनके मुताबिक, उन्हें करीब $7,000 यानी लगभग ₹6.67 लाख अपनी जेब से देने पड़े।
इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि अमेरिका में हेल्थकेयर उनके लिए एक बड़ी चिंता का विषय है और वह भारत वापस आने पर विचार कर रहे हैं।
भारत में पले-बढ़े हैं Yuvaan
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके भारत से संबंध को लेकर सवाल उठाए। इसके जवाब में Yuvaan ने कमेंट में स्पष्ट किया कि वह भारतीय हैं और 16 साल तक पुणे में रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल वह अमेरिका में काम कर रहे हैं।
इससे पहले भी Yuvaan भारत और अमेरिका के जीवन की तुलना करते हुए भारत में हेल्थकेयर की कम लागत और अन्य सुविधाओं पर वीडियो बना चुके हैं। अगस्त की एक रिपोर्ट में उनके एक अन्य वीडियो का जिक्र किया गया था, जिसमें उन्होंने भारत में MRI, X-ray और Blood Work के लिए कम खर्च होने की बात कही थी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने-अपने हेल्थकेयर अनुभव साझा किए। कई लोगों ने अमेरिका में इलाज के दौरान ज्यादा खर्च होने की बात कही, जबकि कुछ यूजर्स ने अमेरिका की हेल्थकेयर व्यवस्था का बचाव भी किया।
कुछ लोगों ने भारत में कम इलाज खर्च और डॉक्टरों तक आसान पहुंच को सकारात्मक बताया। वहीं, अन्य यूजर्स ने कहा कि हेल्थकेयर का अनुभव बीमा योजना, अस्पताल, राज्य, बीमारी और व्यक्ति की आर्थिक स्थिति के अनुसार काफी बदल सकता है।
₹47 हजार बनाम ₹22 लाख: पूरा मामला एक नजर में
| अनुभव | भारत | अमेरिका |
|---|---|---|
| मेडिकल स्थिति | बार-बार बेहोशी | तेज Chest Pain |
| बताए गए टेस्ट | ECG, MRI, CT Scan, Blood Work | कई मेडिकल टेस्ट |
| युवक का बताया कुल खर्च | लगभग ₹47,000 | लगभग ₹22 लाख |
| डॉलर में बिल | करीब $500 | करीब $23,000 |
| Insurance के बाद Out-of-Pocket | — | करीब $7,000 / ₹6.67 लाख |
| अनुभव साझा करने वाला | Yuvaan Ibañez Garware | Yuvaan Ibañez Garware |
नोट: ऊपर दिए गए खर्च और मेडिकल अनुभव संबंधित व्यक्ति के सोशल मीडिया पर किए गए दावों पर आधारित हैं। ये आंकड़े हर मरीज या हर अस्पताल के लिए समान नहीं होते।







