Jagdambika Pal ने लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्षी दलों के हंगामे पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद चलाने में रोज़ाना लगभग ₹9 करोड़ का खर्च आता है और लगातार व्यवधान से करदाताओं के पैसे की बर्बादी हो रही है।
संसद चलाने की लागत पर टिप्पणी
सोमवार को लोकसभा में हंगामे के बीच कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे पाल ने विपक्षी सांसदों से कहा कि सदन को बार-बार बाधित करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि संसद चलाने में लगभग ₹1.5 करोड़ प्रति घंटा, ₹2.5 लाख प्रति मिनट और करीब ₹9 करोड़ प्रतिदिन खर्च होते हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का “गैर-जिम्मेदाराना और अपरिपक्व” व्यवहार जनता के पैसे की बर्बादी कर रहा है।

स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा
पाल ने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पहले ही सदन में स्वीकार किया जा चुका है और उसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
Om Birla के खिलाफ यह प्रस्ताव विपक्षी सांसदों द्वारा पेश किया गया था। पाल ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव पेश करने वाले सांसद को बोलने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए सदन की कार्यवाही चलना जरूरी है।
विपक्ष पर राजनीतिक एजेंडे का आरोप
पाल ने आरोप लगाया कि विपक्ष सदन को चलने नहीं देना चाहता और मुद्दे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और अध्यक्ष दोनों इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन लगातार नारेबाजी से कार्यवाही बाधित हो रही है।

वेस्ट एशिया संकट पर बहस की मांग
सोमवार को अंतराल के बाद जब लोकसभा की बैठक हुई तो विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया। इसी दौरान विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar सदन में एक सुओ मोटू बयान दे रहे थे।
लगातार विरोध के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक, फिर 3 बजे तक, और अंत में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
क्या हुआ आगे
जब दोपहर बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों ने फिर से नारेबाजी शुरू कर दी। पाल ने उन्हें शांत रहने और अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा होने देने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण सदन का कामकाज प्रभावित रहा।





