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perplexity ai ceo aravind srinivas

AI के बढ़ते प्रभाव के बीच Perplexity AI के CEO Aravind Srinivas ने software engineering के भविष्य पर चल रही बहस को समर्थन दिया है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट का समर्थन करते हुए कहा कि Artificial Intelligence और Large Language Models (LLMs) coding के कई साधारण कामों को ऑटोमेट कर रहे हैं, जिससे Computer Science फिर से mathematics और physics आधारित सोच की ओर लौटता दिखाई दे रहा है।

AI coding के कई काम खुद करने लगा है

चर्चा की शुरुआत एक छात्र द्वारा किए गए पोस्ट से हुई थी, जिसमें कहा गया था कि LLMs धीरे-धीरे coding के routine tasks को संभाल रहे हैं

इसका मतलब है कि डेवलपर्स को अब कम समय syntax लिखने में और ज्यादा समय problem-solving, system design और logical thinking पर देना होगा।

टेक इंडस्ट्री के अन्य CEO भी दे चुके हैं संकेत

AI के कारण software engineering में बदलाव को लेकर कई बड़े टेक लीडर्स पहले भी अपनी राय दे चुके हैं।

  • Dario Amodei, CEO – Anthropic
    → उनका कहना है कि 6–12 महीनों में AI अधिकांश coding tasks संभाल सकता है।
  • Replit के CEO
    → उन्होंने कहा कि traditional software engineer की भूमिका भविष्य में काफी बदल सकती है।

GitHub Copilot से productivity में बड़ी बढ़ोतरी

AI coding tools के असर पर पहले भी कई अध्ययन हो चुके हैं।

एक प्रयोग के अनुसार:

  • GitHub Copilot का उपयोग करने वाले developers
  • coding tasks लगभग 55% तेजी से पूरा कर पाए।

इसके अलावा Anthropic AI Exposure Index के अनुसार programming में लगभग 75% tasks AI tools से प्रभावित हो सकते हैं

Senior Engineers अभी भी जरूरी

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि AI अभी भी जटिल system design और नई समस्याओं को हल करने में पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है।

इस वजह से senior engineers की भूमिका अभी भी बहुत महत्वपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि वे:

  • system architecture तय करते हैं
  • बड़े technical decisions लेते हैं
  • AI द्वारा बनाए गए code को verify करते हैं

Computer Science शिक्षा में भी बदलाव

AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए शिक्षा क्षेत्र में भी बदलाव पर चर्चा शुरू हो गई है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में coding syntax सीखने से ज्यादा logical reasoning और mathematics पर जोर दिया जाएगा।

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