तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम में बड़ी राहत
भारत के स्वदेशी तेजस Mk1A फाइटर जेट प्रोग्राम को अमेरिकी कंपनी GE Aerospace की ओर से इंजन सप्लाई में तेजी से बड़ा बढ़ावा मिला है। GE Aerospace ने सितंबर 2026 में चार F404-IN20 इंजन भारत भेजे हैं। इसके साथ तेजस Mk1A कार्यक्रम के लिए अब तक भेजे गए इंजनों की संख्या 14 हो गई है।
इंजन की कमी लंबे समय से तेजस Mk1A के उत्पादन और डिलीवरी में प्रमुख अड़चन रही है। ऐसे में सितंबर में चार और इंजन की खेप पहुंचना HAL के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
GE Aerospace के एक प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी भारत के स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों को शक्ति देने के लिए जरूरी इंजनों की आपूर्ति पर लगातार काम कर रही है और HAL तथा भारतीय वायु सेना के साथ अपनी साझेदारी को लेकर प्रतिबद्ध है।
सितंबर में भेजे गए 4 इंजन, कुल संख्या 14
GE Aerospace ने सितंबर में चार F404-IN20 इंजन भेजे। इससे पहले अगस्त 2026 में कंपनी ने तीन इंजन भेजे थे। अगस्त की खेप के बाद कुल संख्या 10 हो गई थी और सितंबर के चार इंजनों के साथ यह आंकड़ा अब 14 पहुंच गया है।
HAL के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तेजस Mk1A का उत्पादन इंजन उपलब्धता से सीधे जुड़ा हुआ है। इंजन मिलने के बाद तैयार एयरफ्रेम को आगे इंटीग्रेशन, परीक्षण और फ्लाइट टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरना होता है।
HAL के 27 तेजस Mk1A एयरफ्रेम तैयार
इंजन सप्लाई में सुधार के साथ एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। HAL करीब 27 तेजस Mk1A एयरफ्रेम तैयार कर चुका है। हालांकि इन विमानों को भारतीय वायु सेना को सौंपने से पहले कुछ महत्वपूर्ण सिस्टम का इंटीग्रेशन और परीक्षण पूरा करना बाकी है।
HAL के CMD रवि के. ने सितंबर में बताया था कि 27 एयरफ्रेम तैयार हैं, लेकिन AESA रडार और मिसाइल इंटीग्रेशन से जुड़े कुछ मुद्दों के कारण पहली खेप की डिलीवरी में देरी हुई।
इसका मतलब है कि केवल इंजन मिलने से ही विमान तुरंत वायु सेना में शामिल नहीं हो जाएंगे। इंजन इंस्टॉलेशन के बाद सिस्टम इंटीग्रेशन, ग्राउंड टेस्टिंग और उड़ान परीक्षण जैसी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी।
99 F404-IN20 इंजनों का है अनुबंध
तेजस Mk1A के शुरुआती कार्यक्रम के लिए GE Aerospace को 99 F404-IN20 इंजन की आपूर्ति का अनुबंध मिला है। यह समझौता 2021 में हुआ था और इसकी कीमत करीब ₹5,375 करोड़ बताई गई है।
F404-IN20 एक afterburning turbofan engine है, जिसे तेजस जैसे सिंगल-इंजन लड़ाकू विमान को शक्ति देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
GE Aerospace के अनुसार F404 इंजन का तेजस कार्यक्रम से संबंध काफी पुराना है। कंपनी ने बताया है कि F404-IN20 को तेजस के लिए 2004 में चुना गया था और 2016 तक वह HAL को 65 इंजन दे चुकी थी।
इंजन सप्लाई में देरी क्यों हुई?
F404-IN20 की सप्लाई में देरी ने तेजस Mk1A कार्यक्रम को काफी प्रभावित किया। GE के अनुसार जब HAL ने अतिरिक्त इंजन का ऑर्डर दिया था, तब F404-IN20 की उत्पादन लाइन करीब पांच साल से निष्क्रिय थी।
उत्पादन दोबारा शुरू करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन को फिर से सक्रिय करना पड़ा। GE ने यह भी कहा था कि कोविड-19 महामारी के बाद सप्लाई चेन को दोबारा व्यवस्थित करना चुनौतीपूर्ण रहा।
पहला इंजन इस नए ऑर्डर के तहत 25 मार्च 2025 को भारत पहुंचा था। इसके बाद सप्लाई धीरे-धीरे आगे बढ़ी।
अब 2026 में बढ़ सकती है इंजन सप्लाई की रफ्तार
GE ने 2026 में इंजन सप्लाई बढ़ाने की दिशा में काम किया है। अप्रैल में पूर्व HAL चेयरमैन डीके सुनील ने बताया था कि GE ने जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 F404 इंजन देने का आश्वासन दिया था।
अगस्त में तीन और सितंबर में चार इंजन आने के बाद यह लक्ष्य अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
यदि सप्लाई इसी गति से जारी रहती है, तो HAL तैयार एयरफ्रेम को तेजी से पूरा करने की स्थिति में आ सकता है।
तेजस Mk1A के लिए 180 विमानों का ऑर्डर
भारतीय वायु सेना ने HAL से कुल 180 तेजस Mk1A विमान का ऑर्डर दिया है।
पहला बड़ा अनुबंध फरवरी 2021 में 83 विमानों के लिए हुआ था। इसके बाद सितंबर 2025 में अतिरिक्त 97 तेजस Mk1A विमानों के लिए अनुबंध किया गया। दूसरे अनुबंध की कुल कीमत टैक्स को छोड़कर ₹62,370 करोड़ से अधिक बताई गई है।
इस तरह तेजस Mk1A भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान बेड़े को मजबूत करने की महत्वपूर्ण परियोजना बन गया है।
तेजस Mk1A में क्या है खास?
तेजस Mk1A को पुराने तेजस Mk1 की तुलना में कई महत्वपूर्ण अपग्रेड के साथ विकसित किया गया है।
इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- AESA रडार
- Electronic Warfare Suite
- Beyond Visual Range (BVR) मिसाइल क्षमता
- Air-to-Air Refuelling Capability
- बेहतर एवियोनिक्स
- आधुनिक मिशन सिस्टम
इन सिस्टम के इंटीग्रेशन और परीक्षण के कारण भी विमान की डिलीवरी प्रक्रिया जटिल हुई है।
इंजन मिलने के बाद भी ये काम जरूरी
तेजस Mk1A के लिए इंजन की उपलब्धता निश्चित रूप से एक बड़ी बाधा को कम करती है, लेकिन इसके बाद भी कई चरण पूरे करने होते हैं।
इंजन इंस्टॉलेशन → सिस्टम इंटीग्रेशन → ग्राउंड टेस्ट → रडार और हथियार परीक्षण → फ्लाइट टेस्ट → अंतिम स्वीकृति → IAF को डिलीवरी
इसलिए तैयार एयरफ्रेम की संख्या और वास्तविक रूप से वायु सेना को सौंपे गए विमानों की संख्या अलग-अलग हो सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम है तेजस?
तेजस Mk1A भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान बेड़े को मजबूत करने के साथ-साथ देश की स्वदेशी एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
तेजस के उत्पादन में HAL, DRDO की Aeronautical Development Agency और देश की कई निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। हालांकि F404 इंजन के लिए अभी विदेशी सप्लायर पर निर्भरता बनी हुई है।
भविष्य के तेजस Mk2 और AMCA जैसे कार्यक्रमों के लिए इंजन तकनीक और घरेलू उत्पादन क्षमता भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
GE-HAL साझेदारी में आगे क्या?
GE Aerospace और भारतीय वायु सेना ने अप्रैल 2026 में भारत में F404-IN20 इंजन के लिए इन-कंट्री डिपो स्थापित करने की दिशा में समझौता भी किया था।
इस सुविधा का उद्देश्य इंजन की मरम्मत और ओवरहाल क्षमता को भारत में मजबूत करना है। GE तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, सपोर्ट स्टाफ, स्पेयर पार्ट्स और विशेष उपकरण उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
इससे भविष्य में इंजन के रखरखाव और उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
तेजस Mk1A: मुख्य अपडेट
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| विमान | LCA Tejas Mk1A |
| निर्माता | HAL |
| इंजन | GE F404-IN20 |
| सितंबर 2026 में भेजे इंजन | 4 |
| अब तक भेजे गए इंजन | 14 |
| शुरुआती इंजन अनुबंध | 99 |
| तैयार एयरफ्रेम | 27 |
| IAF का कुल Mk1A ऑर्डर | 180 |
| प्रमुख रडार | AESA |
| प्रमुख क्षमता | BVR मिसाइल, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग |
| मुख्य चुनौती | इंजन सप्लाई और सिस्टम इंटीग्रेशन |








