NSE Share Price: ₹3,225 करोड़ के शेयरों का लॉक-इन खत्म, NSE के शेयरों में गिरावट; जानें आगे का रुझान
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयरों में 22 अक्टूबर 2026 को गिरावट दर्ज की गई। करीब ₹3,225 करोड़ मूल्य के शेयरों का एक महीने का लॉक-इन पीरियड समाप्त होने के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर रही कि बाजार में बिकवाली का दबाव कितना बढ़ सकता है। NSE का शेयर बीएसई पर 0.64% गिरकर ₹1,695.60 पर बंद हुआ, जबकि कारोबार के दौरान यह ₹1,683 तक फिसल गया था।
हालांकि, लॉक-इन खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि सभी शेयर बिक गए हैं। इसका अर्थ केवल इतना है कि संबंधित शेयरधारकों को अब उन शेयरों को बेचने की अनुमति मिल गई है, जिससे बाजार में संभावित सप्लाई बढ़ सकती है।
NSE के शेयरों में गिरावट की 3 बड़ी वजहें
1. ₹3,225 करोड़ के शेयरों का लॉक-इन समाप्त
नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 1.89 करोड़ शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म हुआ। ये NSE की करीब 1% इक्विटी होल्डिंग के बराबर बताए गए हैं। अब संबंधित शेयरधारक इन शेयरों को बेच सकते हैं, जिससे संभावित बिकवाली की आशंका बढ़ी।
2. शेयर रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसला
NSE का शेयर 22 अक्टूबर को कारोबार के दौरान ₹1,683 तक गिर गया। अंत में यह 0.64% की गिरावट के साथ ₹1,695.60 पर बंद हुआ। इससे निवेशकों का ध्यान शेयर में जारी कमजोरी पर गया।
3. लिस्टिंग के बाद से दबाव
NSE का IPO मूल्य ₹1,785 था और 24 सितंबर 2026 को शेयर ₹1,800 पर लिस्ट हुआ था। लिस्टिंग के दिन यह ₹1,878 के उच्च स्तर तक पहुंचा, लेकिन इसके बाद इसमें गिरावट आई।
NSE शेयर का अब तक का प्रदर्शन
| विवरण | कीमत |
|---|---|
| IPO इश्यू प्राइस | ₹1,785 |
| लिस्टिंग प्राइस | ₹1,800 |
| रिकॉर्ड उच्च स्तर | ₹1,878 |
| 22 अक्टूबर का बंद भाव | ₹1,695.60 |
| 22 अक्टूबर का इंट्राडे निचला स्तर | ₹1,683 |
रिपोर्ट के अनुसार, ₹1,878 के रिकॉर्ड उच्च स्तर से शेयर करीब 10.39% गिरकर ₹1,683 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंचा।
आगे NSE के शेयरों का क्या रहेगा रुझान?
ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ने NSE पर कवरेज शुरू करते हुए Outperform रेटिंग दी और ₹1,965 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया। रिपोर्ट में प्रभुदास लीलाधर, Emkay और एशियन मार्केट सिक्योरिटीज की ओर से भी कवरेज शुरू करने तथा सकारात्मक रेटिंग देने का उल्लेख है।
हालांकि, ब्रोकरेज का टारगेट प्राइस निश्चित भविष्यवाणी नहीं है। लॉक-इन समाप्त होने के बाद शेयरों की वास्तविक सप्लाई, निवेशकों की मांग और बाजार की परिस्थितियां आगे की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
- लॉक-इन खत्म होने का मतलब सभी शेयरों की अनिवार्य बिक्री नहीं है।
- संभावित बिकवाली का दबाव शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है।
- निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन और जोखिम का आकलन करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार सामग्री पर आधारित है, निवेश सलाह नहीं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।







