राज्यसभा की 37 सीटों के लिए इस साल चुनाव हो रहे हैं, जिन पर देशभर की राजनीतिक पार्टियों की नजर टिकी हुई है।
इनमें से सात राज्यों के 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जबकि बाकी 11 सीटों के लिए तीन राज्यों – बिहार, ओडिशा और हरियाणा – में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
इन राज्यों में चुनावी गणित और संभावित क्रॉस-वोटिंग के कारण यह चुनाव विपक्षी दलों के लिए एक तरह से राजनीतिक वफादारी की परीक्षा बन गया है।
सात राज्यों में 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए
महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, असम और हिमाचल प्रदेश से 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं।
इनमें कई बड़े राजनीतिक नाम शामिल हैं, जैसे:
- शरद पवार
- अभिषेक मनु सिंघवी
- रामदास अठावले
- तिरुचि शिवा
इसके अलावा अनबुमणि रामदास, राहुल सिन्हा, बाबुल सुप्रियो, कोयल मलिक और मेनका गुरुस्वामी जैसे नाम भी शामिल हैं।
बिहार में पांचवीं सीट पर कड़ा मुकाबला
बिहार में इस बार पांच राज्यसभा सीटें खाली हुई हैं। विधानसभा की कुल संख्या 243 है और जीत के लिए 41 वोट जरूरी हैं।
एनडीए के पास पर्याप्त संख्या होने के कारण जेडीयू के नीतिश कुमार और रामनाथ ठाकुर तथा बीजेपी के नितिन नवीन और शिवम कुमार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
लेकिन पांचवीं सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं और बहुमत से छह वोट कम हैं। इसके लिए तेजस्वी यादव ने AIMIM से समर्थन मांगा है, जिसके पास बिहार में पांच विधायक हैं।
ओडिशा में भी समीकरण अहम
ओडिशा में इस बार चार राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है।
विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार बीजेपी के दो उम्मीदवार आसानी से जीत सकते हैं।
वहीं बीजेडी के एक उम्मीदवार की जीत भी लगभग तय मानी जा रही है।
लेकिन चौथी सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है, जहां बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को अतिरिक्त वोटों की जरूरत है और इसके लिए अन्य दलों से समर्थन मिलने की संभावना पर नजर है।
हरियाणा में क्रॉस-वोटिंग की आशंका
हरियाणा में दो राज्यसभा सीटें खाली हैं और विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं।
बीजेपी के पास सहयोगियों और निर्दलीय विधायकों के साथ 53 वोट हैं, जिससे उसकी एक सीट लगभग पक्की मानी जा रही है।
दूसरी ओर कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और उसके उम्मीदवार की जीत भी संभव है।
हालांकि एक निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नंदल के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
संभावित क्रॉस-वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस ने अपने कई विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेज दिया है, ताकि किसी तरह की टूट-फूट रोकी जा सके।





