भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव बन गया है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ रहा है।
इसी दबाव के चलते तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने सरकार से ईंधन की कीमतें बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा कीमतों पर बिक्री करने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। खासतौर पर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और विमान ईंधन (ATF) पर घाटा बढ़ता जा रहा है।
इस उछाल के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। ईरान के खिलाफ संभावित नौसैनिक नाकेबंदी से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का खतरा पैदा हो गया है, जो दुनिया की तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। अगर ऐसा हुआ तो सप्लाई बाधित हो सकती है और कीमतें और बढ़ सकती हैं।
हालांकि, सरकार फिलहाल आम जनता को राहत देने के मूड में नजर आ रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता जरूर है, लेकिन फिलहाल कीमतें बढ़ाने का कोई तत्काल फैसला नहीं लिया गया है।
वैश्विक स्तर पर देखें तो डीजल की कीमतों में करीब 119% और पेट्रोल में 69% तक बढ़ोतरी हुई है। एलपीजी भी 40% से ज्यादा महंगी हो चुकी है। वहीं भारत में अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं और घरेलू गैस सिलेंडर में मामूली बढ़ोतरी की गई है।
आने वाले समय में सरकार के सामने दो विकल्प होंगे—या तो कीमतें बढ़ाकर बोझ जनता पर डाले, या फिर कंपनियों को सब्सिडी देकर राहत दे। दोनों ही स्थितियों में असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है।







