⚡ पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आता दिखाई दे रहा है। Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress अपने सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रही है।
बुधवार को निष्कासित विधायक Ritabrata Banerjee ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर दावा किया कि उन्हें पार्टी के लगभग 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इस दावे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है।
🚨 TMC में खुलकर सामने आई बगावत
सूत्रों के मुताबिक विधानसभा में TMC के करीब 60 विधायक एक महत्वपूर्ण बैठक में पहुंचे। यह संख्या पार्टी के कुल विधायकों का लगभग दो-तिहाई बताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह स्थिति Maharashtra Political Crisis 2022 जैसी हो सकती है, जहां बड़े स्तर पर विधायकों के समर्थन से पार्टी में विभाजन हुआ था।
📝 हस्ताक्षर विवाद से बढ़ा विवाद
पूरे विवाद की शुरुआत विधानसभा में विपक्ष के नेता के समर्थन से जुड़े एक प्रस्ताव पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों से हुई।
TMC विधायक Sandipan Saha और Ritabrata Banerjee ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की और कई विधायकों के बयान भी दर्ज किए गए।
🎯 अभिषेक बनर्जी पर भी बढ़ा दबाव
विवाद बढ़ने के बाद TMC के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के भतीजे Abhishek Banerjee का नाम भी चर्चा में आ गया।
मामले की जांच कर रही एजेंसियां कथित दस्तावेजी अनियमितताओं और शिकायतों की जांच कर रही हैं।
🗣️ ममता बनर्जी का पलटवार
स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने बागी नेताओं की तुलना “मीर जाफर” से की।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी ताकतें और प्रशासनिक दबाव के जरिए TMC विधायकों को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
ममता ने कहा कि पार्टी को कमजोर करने और नई तृणमूल बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने देंगे।
📉 धरना कार्यक्रम में कम दिखी मौजूदगी
राजनीतिक संकट के बीच ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में अपेक्षा से कम विधायक और सांसद पहुंचे।
इसी कारण राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा और तेज हो गई कि पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ रहा है।
🔥 “महाराष्ट्र मॉडल” की चर्चा
पूर्व TMC नेता और वर्तमान मंत्री Tapas Roy ने भी सोशल मीडिया पर दावा किया कि 50 से अधिक विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि TMC की स्थिति अब महाराष्ट्र की तरह होती दिख रही है और पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
📊 आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बागी खेमे के पास वास्तव में दो-तिहाई विधायकों का समर्थन है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं।







