पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। 2026 विधानसभा चुनाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या Mamata Banerjee अपना मजबूत किला बचा पाएंगी या Bharatiya Janata Party इस बार बड़ा उलटफेर कर देगी? 🤔
294 सीटों वाली विधानसभा के लिए दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में मतदान हो चुका है, और अब नतीजों का इंतजार है। लेकिन इस बार चुनाव सिर्फ TMC vs BJP की सीधी लड़ाई नहीं, बल्कि कई जटिल मुद्दों का मिश्रण बन गया है।
📊 10 पॉइंट्स में समझें पूरा चुनावी गणित
1️⃣ वोटर लिस्ट बना सबसे बड़ा मुद्दा
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत करीब 90 लाख नाम हटाए गए, जो कुल वोटर्स का लगभग 12% है।
2️⃣ आरोप-प्रत्यारोप तेज
चुनाव आयोग इसे सफाई प्रक्रिया बता रहा है, जबकि ममता बनर्जी ने इसे साजिश करार दिया।
3️⃣ सीमावर्ती जिलों में असर
मालदा, मुर्शिदाबाद और 24 परगना जैसे इलाकों में इसका ज्यादा असर दिखा, जहां अल्पसंख्यक वोटर बड़ी संख्या में हैं।
4️⃣ रिकॉर्ड वोटिंग प्रतिशत
- पहले चरण में ~93%
- दूसरे चरण में ~90%
👉 कम वोटर संख्या के कारण प्रतिशत ज्यादा दिखने की भी चर्चा है।
5️⃣ सत्ता विरोधी लहर या समर्थन?
कुछ विश्लेषक इसे एंटी-इनकंबेंसी मान रहे हैं, वहीं TMC इसे अपनी योजनाओं का असर बता रही है।
6️⃣ उत्तर vs दक्षिण बंगाल
- उत्तर बंगाल में BJP मजबूत
- दक्षिण बंगाल अभी भी TMC का गढ़
👉 BJP इस बार दक्षिण में सेंध लगाने की कोशिश में है
7️⃣ मतुआ वोट बैंक की भूमिका
CAA के मुद्दे पर BJP इस समुदाय को साधने की कोशिश कर रही है, जो चुनावी नतीजों में बड़ा फैक्टर बन सकता है।
8️⃣ भ्रष्टाचार के आरोप
ED और CBI की कार्रवाई से TMC की छवि पर असर पड़ा है, जिसे BJP चुनावी मुद्दा बना रही है।
9️⃣ एग्जिट पोल में अनिश्चितता
किसी में BJP आगे, तो किसी में TMC—यहां तक कि हंग विधानसभा की भी संभावना जताई जा रही है।
🔟 असली सवाल
क्या ममता बनर्जी फिर से सत्ता में वापसी करेंगी, या BJP बंगाल में स्थायी पकड़ बना लेगी?



