Nitish Kumar एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में हैं। करीब 21 साल बाद उन्होंने दिल्ली की राजनीति में वापसी कर ली है।
राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के साथ ही उनका यह कदम एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
🏛️ दिल्ली से पटना और फिर दिल्ली तक का सफर
नीतीश कुमार ने 2005 में लोकसभा सांसद पद छोड़कर बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद लगभग दो दशकों तक बिहार की राजनीति उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती रही।

अब, 2026 में फिर से राज्यसभा सांसद बनकर दिल्ली लौटना, उनके राजनीतिक सफर का एक “फुल सर्कल मोमेंट” माना जा रहा है।
🔄 21 साल में कई बड़े राजनीतिक यू-टर्न
नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा गठबंधन और रणनीतिक फैसलों के लिए जानी जाती रही है:
- NDA के साथ शुरुआत
- 2013 में NDA से अलग
- 2017 में फिर NDA में वापसी
- 2022 में फिर अलग
- 2024 में दोबारा NDA में शामिल
इन बदलावों ने उनकी छवि एक लचीले लेकिन रणनीतिक नेता के रूप में बनाई है।

🪑 CM पद छोड़ने के संकेत
नीतीश कुमार ने खुद कहा है कि:
👉 “मैंने बिहार में काफी काम कर लिया है, अब दिल्ली में रहकर काम करना चाहता हूं।”
संभावना है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और नई सरकार का गठन होगा।
📊 चारों सदनों के सदस्य बनने का रिकॉर्ड
नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जो:
- लोकसभा
- राज्यसभा
- विधानसभा
- विधान परिषद
चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं — यह उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा को दर्शाता है।
❓ अब दिल्ली में क्या होगा रोल?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब दिल्ली में उनकी भूमिका क्या होगी:
- क्या वे केंद्र सरकार में मंत्री बनेंगे?
- या NDA के अंदर कोई बड़ा रणनीतिक रोल निभाएंगे?
- या गठबंधन के संयोजक बन सकते हैं?
विशेषज्ञ मानते हैं कि उनका अनुभव उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में अहम खिलाड़ी बना सकता है।






