पुणे स्थित Savitribai Phule Pune University (SPPU) के इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित International Food Festival ने इस बार सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी दिया। यह आयोजन International Youth Festival 2026 के तहत किया गया, जिसमें दुनियाभर की संस्कृतियों और व्यंजनों की झलक देखने को मिली।
इस फेस्टिवल में 25 से अधिक देशों के विदेशी छात्रों ने अपने-अपने देश के पारंपरिक व्यंजन पेश किए। नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, रूस, श्रीलंका, वियतनाम, मंगोलिया, मिस्र, मोज़ाम्बिक सहित कई देशों के फूड स्टॉल्स ने लोगों को आकर्षित किया।
🍲 खाने के साथ-साथ सीखने का मौका
हर स्टॉल पर छात्र न सिर्फ खाना परोस रहे थे, बल्कि उसकी संस्कृति, इतिहास और बनाने की विधि के बारे में भी जानकारी दे रहे थे। नेपाल के मोमो, चोइला, बांग्लादेश के पारंपरिक स्नैक्स और रूस व अफ्रीकी देशों के खास व्यंजन लोगों के बीच खासे लोकप्रिय रहे।
🚫 “Say No To Drugs” का मजबूत संदेश
फेस्टिवल की सबसे खास बात रही इसका सामाजिक संदेश —
👉 “Say No To Drugs, Say Yes To Life”
आयोजकों का कहना था कि युवाओं को नशे से दूर रखने और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं। इस संदेश को गीत, पोस्टर और स्टूडेंट इंटरएक्शन के ज़रिए प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।
🎓 छात्रों की सक्रिय भागीदारी
SPPU के भारतीय और विदेशी छात्रों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया। फूड स्टॉल सजावट से लेकर मैनेजमेंट तक, हर स्तर पर छात्रों की भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र और आम नागरिक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
🌍 संस्कृति, एकता और दोस्ती का मंच
यह फेस्टिवल केवल एक फूड इवेंट नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान, अंतरराष्ट्रीय भाईचारे और युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने का एक मजबूत मंच बनकर उभरा।

🎤 थीम का उद्देश्य
कार्यक्रम के एंकर Kavin ने बताया कि हर साल फेस्टिवल की थीम समकालीन सामाजिक मुद्दों को ध्यान में रखकर तय की जाती है।
उन्होंने कहा,
“हर साल थीम इस बात को दर्शाती है कि समाज और युवाओं के बीच क्या चल रहा है। इस साल युवाओं से जुड़े मुद्दों पर फोकस किया गया है।”
यह संदेश फेस्टिवल के दौरान प्रस्तुत किए गए थीम सॉन्ग के माध्यम से भी गूंजता रहा।
🍛 दुनियाभर के स्वाद, एक ही कैंपस में
फेस्टिवल की शुरुआत अफगानिस्तान के स्टॉल से हुई, जिसके बाद
बांग्लादेश, मंगोलिया, एरिट्रिया, चाड, रूस, फिजी, नेपाल, श्रीलंका, जिबूती, मिस्र, साउथ सूडान, ईरान, मोज़ाम्बिक और वियतनाम जैसे देशों के स्टॉल्स पर भारी भीड़ देखने को मिली।
कई छात्रों ने ये व्यंजन कॉलेज और यूनिवर्सिटी हॉस्टल्स में खुद तैयार किए और
👉 आगंतुकों के साथ रेसिपी, सामग्री और पकाने के तरीकों की जानकारी भी साझा की।

🇳🇵 नेपाल के स्टॉल पर खास आकर्षण
नेपाल का प्रतिनिधित्व कर रहे
प्रथम पटेल, जो BBA IB (International Business) के सेकेंड ईयर छात्र हैं, ने अपने साथियों के साथ
- 🥟 चोइला
- 🍜 झोल मोमो
- 🥔 चाटपटे (उबले आलू, मुरमुरे और Wai Wai नूडल्स से बना स्ट्रीट स्नैक)
परोसे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “मौमो” को अक्सर गलत तरीके से “मॉमोज़” कहा जाता है।
🤝 छात्रों का सहयोग और टीमवर्क
फेस्टिवल की खास बात यह रही कि अलग-अलग विभागों के छात्रों ने एक-दूसरे की मदद की।
- उज्बेकिस्तान की Nafosat ने मंगोलियन स्टॉल लगाने में अपने दोस्त की मदद की।
- SPPU के मनोविज्ञान (Psychology) विभाग के छात्रों ने रूसी स्टॉल को सजाने में सहयोग किया, जहां बर्फ के फ्लेक्स जैसी सजावट की गई।
🗣️ खाने से जुड़ी संस्कृति और पहचान
अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रहे Wali Rahman Rahmani ने कहा कि
“खाना सिर्फ पोषण नहीं है, बल्कि यह भूगोल, इतिहास और सामूहिक स्मृति से जुड़ी एक सांस्कृतिक भाषा है।”
उन्होंने आगे कहा कि भोजन लोगों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है —
जहां संघर्ष अक्सर संसाधनों को लेकर होते हैं, वहीं शांति और संवाद अक्सर एक साझा भोजन की मेज़ पर लौट आते हैं।

🎓 अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों की प्रतिक्रिया
Symbiosis Institute of Health Sciences के छात्र Ahmed ने कहा कि
“एक ही जगह पर इतनी सारी संस्कृतियां और व्यंजन मिलना बेहद दुर्लभ है।”
वहीं ईरान से आए PhD छात्र Aboubakr Rigi ने कहा कि ऐसे आयोजनों से भविष्य के अंतरराष्ट्रीय रिश्ते मजबूत होते हैं।
उन्होंने पूर्व अफगान राष्ट्रपति Hamid Karzai का उदाहरण देते हुए कहा कि
“कौन जानता है, यहां मौजूद कोई छात्र आगे चलकर अपने देश का नेतृत्व करे।”
🎶 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और समापन
फेस्टिवल में Bella Ciao जैसे गीतों की प्रस्तुति भी हुई।
दिन के अंत तक अधिकांश स्टॉल्स का सामान बिक चुका था।
संगीत और नृत्य के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और देर शाम तक लोग धीरे-धीरे परिसर से लौटते नजर आए।









