nasa artemis rocket launch

nasa artemis rocket launch

चंद्रमा मिशन की तैयारी कर रही NASA को एक बार फिर तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ा है। अंतरिक्ष एजेंसी के नए मून रॉकेट के फ्यूलिंग टेस्ट के दौरान हाइड्रोजन लीक का पता चला, जिससे परीक्षण को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।

🔍 क्या है पूरा मामला?

सोमवार दोपहर, फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर में 322 फीट (98 मीटर) लंबे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट में सुपर-कोल्ड लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन भरी जा रही थी। यह एक अहम “ड्रेस रिहर्सल” टेस्ट था, जिसमें असली लॉन्च की तरह फ्यूलिंग और काउंटडाउन की पूरी प्रक्रिया दोहराई जाती है।

करीब 7 लाख गैलन (2.6 मिलियन लीटर) ईंधन रॉकेट में भरा जाना था और कई घंटों तक उसे टैंकों में सुरक्षित रखना जरूरी था। लेकिन टेस्ट शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद रॉकेट के निचले हिस्से के पास अत्यधिक हाइड्रोजन रिसाव दर्ज किया गया। इसके बाद एहतियातन फ्यूलिंग रोक दी गई, उस वक्त तक कोर स्टेज सिर्फ आधा ही भरा था।

🛠️ पहले भी आई थी ऐसी समस्या

हाइड्रोजन लीक की यह दिक्कत नई नहीं है। इससे पहले 2022 में हुए पहले SLS लॉन्च के दौरान भी इसी तरह की तकनीकी परेशानियां सामने आई थीं, जिनकी वजह से रॉकेट को कई महीनों तक लॉन्च पैड पर ही रोके रखना पड़ा था।

इस बार भी इंजीनियरों की टीम ने पुराने अनुभवों के आधार पर समस्या को सुलझाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

👨‍🚀 क्रू कहां से कर रहा है मॉनिटर?

इस मिशन में शामिल तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर से पूरे टेस्ट पर नजर बनाए हुए हैं। लॉन्च से पहले वे करीब डेढ़ हफ्ते से क्वारंटीन में हैं और इस टेस्ट के नतीजों पर ही उनकी उड़ान की तारीख तय होगी।

⏳ लॉन्च डेट पर क्यों है दबाव?

कड़ाके की ठंड के चलते टेस्ट पहले ही दो दिन देरी से चल रहा है। NASA ने काउंटडाउन क्लॉक को इंजन इग्निशन से ठीक 30 सेकंड पहले रोकने की योजना बनाई है, ताकि सभी प्रक्रियाओं की गहन जांच की जा सके।

अगर यह फ्यूलिंग डेमो समय पर और सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो कमांडर रीड वाइसमैन और उनकी टीम रविवार तक लॉन्च कर सकती है। हालांकि रॉकेट को 11 फरवरी तक उड़ान भरनी जरूरी है, वरना मिशन को मार्च तक टालना पड़ेगा। फरवरी में सीमित लॉन्च विंडो होने के कारण विकल्प भी कम हैं।

🌕 मिशन का लक्ष्य क्या है?

करीब 10 दिन की इस उड़ान में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के बेहद करीब से गुजरेंगे, उसकी रहस्यमयी फार साइड के चारों ओर घूमेंगे और फिर सीधे पृथ्वी पर लौट आएंगे।
इस मिशन में लूनर लैंडिंग या ऑर्बिट नहीं होगी, बल्कि कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट और अन्य अहम सिस्टम्स की टेस्टिंग की जाएगी।

NASA ने आखिरी बार 1960–70 के दशक में Apollo मिशन के तहत इंसानों को चांद पर भेजा था। नया Artemis प्रोग्राम भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top